बारिश थमने के बाद सतना में जलजनित और संक्रामक बीमारियां बढ़ीं तो जिला अस्पताल में 1610 मरीज पहुंचे और 174 गंभीर मरीज भर्ती हुए। वार्डों में बेड कम पड़े और आईसीयू का एसी बंद रहा।
सतना जिला अस्पताल में बदलते मौसम के साथ मरीजों की भीड़ बेकाबू हो गई है। वार्डों में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, जिससे व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। कई मरीजों को गद्दे और साफ चादर तक नहीं मिल पा रही। ओपीडी में रोजाना 1800–1900 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें से सैकड़ों को भर्ती करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल सहित मैहर और अमरपाटन सिविल अस्पताल में आभा आईडी पंजीयन को लेकर मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। डायरेक्ट्रेट के निर्देश अनुसार पैथोलॉजिकल जांच अब आभा आईडी से ही की जा रही है। केवल आपात स्थिति में ही बिना आभा आईडी जांच की अनुमति दी जा रही है। दो दिनों में कुल 1139 मरीजों ने पंजीयन कराया।
सतना जिला अस्पताल में सोमवार को 2250 से ज्यादा मरीजों ने ओपीडी में पंजीयन कराया, जो 2012 के बाद सबसे बड़ी संख्या है। बदलते मौसम में वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और पेट दर्द से पीड़ित मरीजों की भीड़ ने अस्पताल की व्यवस्था चरमराई दी। वार्ड फुल हो गए और बच्चों का पीकू वार्ड क्षमता से दोगुना भर गया।
















